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मैंग्रोव वन का संरक्षण 🌳

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केन्द्र सरकार ने मैंग्रोव वनों के घटते आवरण को देखते हुए " मिष्टी ' योजना की घोषणा की है. इसके तहत देश में तटीय और भूमि क्षेत्रों में मैंग्रोव वनों के विकास और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. भारत में ज्यादातर तटीय क्षेत्र समुन्द्र के किनारे हैं खारे पानी में ये मिट्टी के अपरदन को रोकता हैं जो बहुत से जलीय जीव जंतुओ का घर होता हैं यूनेस्को के अनुसार, दुनिया भर में मैंग्रोव वनों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा नष्ट हो चुका है या क्षरण की कगार पर है. इसकी रोकथाम के लिए क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन व योजना प्राधिकरण (कैंपा फंड) प्रभावित हैं  मैंग्रोव जैव विविधता की प्रचुरता और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के केन्द्र होते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन, वनोन्मूलन, कृषि के प्रसार, मत्स्य पालन की अधिकता, प्रदूषण की मार और तटीय क्षेत्रों में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेपों के कारण आज ये सिकुड़ते जा रहे हैं. भारत वन स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मैंग्रोव वन कुल भू-क्षेत्र के केवल 0.15 प्रतिशत यानी 4992 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हैं. मैंग्रोव का सबसे बड़ा क्षेत्र पश्चिम बंगाल 42.45% हैं   देश के ...

गंगा जल का महत्व 🌊

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                             -:  गंगा जल :- अमेरिका में एक लीटर गंगाजल 250 डालर में क्यों मिलता है ? गंगाजल कों रोज रोज पिने से रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हों जाती हैं वैसे कुछ डॉ. कहते हैं की गंगाजल एक तरह से दवा का काम करती हैं सर्दियों के महीने में गंगाजल तो मरते हुए व्यक्ति के मुंह में डाला जाता है, हमने तो ऐसा सुना है ; तो डॉक्टर साहिब बोले- नहीं ! कई रोगों का इलाज भी है। दिन में तीन बार दो-दो चम्मच गंगाजल पिया और तीन दिन में खांसी ठीक हो गई। यह अनुभव है, हम इसे गंगाजल का चमत्कार नहीं मानते, उसके औषधीय गुणों का प्रमाण मानते हैं। कई इतिहासकार बताते हैं कि सम्राट अकबर स्वयं तो गंगा जल का सेवन करता ही था, मेहमानों को भी गंगा जल पिलाता था। इतिहासकार लिखते हैं कि अंग्रेज जब कलकत्ता से वापस इंग्लैंड जाते थे, तो पीने के लिए जहाज में गंगा का पानी ले जाते थे, क्योंकि वह सड़ता नहीं था। इसके विपरीत अंग्रेज जो पानी अपने देश से लाते थे वह रास्ते में ही सड़ जाता था। करीब सवा सौ साल पहले आगरा में तैनात ब्रिटि...

अंतर्राष्ट्रीय बाघ 🐅 दिवस

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बाघ  एक ऐसा, जानवर हैं जो नजर हमेशा अपने शिकार की तलाश में रहती हैं। जैसे ही उसे अपना लक्ष्य मिल जाता है, वह छलांग लगाने और शिकार करने में देर नहीं लगाता। जंगल का पत्ता पत्ता बाघ की तेजी और शक्ति से डरता है। परंतु जिससे सबको भय है, वह खुद भी जंगल में सुरक्षित नहीं है। अपने ही घर में भी बाघ की जान खतरे में है। जो पशु जंगल जिसे पशु का राजा हो, वह मानव से असुरक्षित है, जो उसके फायदे के लिए आधुनिक हथियारों की मदद से बड़ी आसानी से उसका शिकार कर लेते है। 20वीं सदी के बाद से, दुनिया में बाघों की कुल संख्या में काफी दर से कमी आई है। दुनिया में बाघों की आधी से भी कम प्रजातियां बची है, जो जलवायु परिवर्तन, शिकार और अवैध शिकार, बीमारियों, आवास के नुकसान और ऐसे कई मुद्दों के कारण होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि से पीड़ित हैं। नवीनम बाघ गणना के अनुसार भारत में बाघ की संख्या 2,967 है, जो विश्व की संख्या का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक है। भारत में बाघों की घटती आबादी को बचाने की उम्मीद में, सरकार ने 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च   किया, जो बेहद मददगार रहा है और इससे बाघों क...

Plastic Bag Free India

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International Plastic Bag Free Day is dedicated to raising awareness about the very real and pressing issues of plastic pollution. International Plastic Bag Free Day is celebrated on July 3rd every year to create awareness about the dangers of using plastic. It is also to encourage people against using a plastic bag. So on International Plastic Free Bag Day 2022, let’s pledge to avoid the use of plastic bags and encourage the use of eco-friendly bags. Every day, we learn more about how plastic is affecting this planet and how conglomerates are cutting down on plastic. But as an individual, you need to do your part too. We need to think it through when using plastic bags in regard to what it does to our environment and how it will wreak havoc in the coming years. Plastic bags remain in the world for anywhere from 100-500 years before finally decaying completely. It is imperative that we collectively take action. International Plastic Bag Free Day was created by Bag Free Worl...

पर्यावरण प्रेमी

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किसी को पर्यावरण की चिंता ही नहीं है, ये कहते हुए उसने चाय की कुल्हड़ सड़क पर फेंका और चला गया।  हम इंसान अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरे के सर फोड़ कर अपने कर्तव्यों से छुटकारा पाना चाहते है। 5 जून आते ही देश भर में भिन्न भिन्न तरह के पर्यावरण प्रेमी का जन्म होता है, जिसमें से अधिकतर लोगों को इस बात की चिंता होती है कि पेड़ों की संख्या कम हो गयी है जिससे गर्मी का प्रभाव बढ़ा है जबकि कुछ लोग सोचते हैं कि दुनिया से पीने योग्य पानी ख़त्म हो जाएगा तो ज़िन्दगी कैसे संभव होगा। नहीं जानते है ऐसे लोग कि ये सब क़ुदरत की मर्ज़ी है और हमारे ही अव्यवस्थित कामों का परिणाम।  आमतौर से यही देखा जाता है कि हम उन्हीं चीजों को संरक्षित करने के लिए चिंतित होते है जो हम इंसानों के बस का नहीं है। कुछ लोग ये मानते होंगे कि इंसान ऐसा कर सकता है लेकिन मेरा ऐसा मानना बिल्कुल भी नहीं है अगर ऐसा कर पाना संभव होता हो आज गंगा का पानी पीने योग्य होता, यमुना अपने निर्मलता को लिए खिलखिलाती और बहुत सारी नदियाँ अपने अस्तित्व की जंग नहीं लड़ रही होती। आज दुनिया को पर्यावरण प्रदूषण का सबसे ज्यादा ख़तरा किसी चीज़ से ...

प्लास्टिक मुक्त भारत हो पाएगा ?

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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर की गई एक अनोखी पहल ने दुनिया का ध्यान खींचा है एक देश ऐसा है जहां प्लास्टिक जमा करने पर मुफ्त में यात्रा कर सकते हैं उस शहर में हर बस स्टॉप पर एक मशीन लगाए जा रहे हैं जिसमें खाली बोतले जमा करने पर अंक दिए जाएंगे इसका इस्तेमाल करके बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं देखा गया कि लोग यात्रा के दौरान पानी की बोतले खरीदते हैं और पीने के बाद फेंक देते हैं उसे फेंकने के बजाय थोड़ी समझदारी दिखाएं अपनी यात्रा व्यय में लगाए  UAE के इस पहल से कई फायदे होंगे  प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण तथा स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को देखते हुए पूरी दुनिया प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की नियमित संजीदा होते दिख सकती है   भारत सरकार आगामी एक जुलाई से एकल उपयोग प्लास्टिक (Single Use Plastic) के उत्पादन , भंडारण, विक्रय और इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने जा रही है दुनिया भर में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार 1950 में वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण का आकार 20 लाख टन था जो 2...

मदर्स-डे (8 मई)

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माँ/माता/माई/मम्मी/मॉम/अम्मा/अम्मी कुछ भी कह लीजिए, ज़ेहन में सिर्फ और सिर्फ एक फ़रिश्ते सा चेहरा उभर कर ही आता है, फ़रिश्ता लफ्ज़ भी उस अज़ीम हस्ती के लिए एक छोटा लफ्ज़ होगा, "माँ के कदमों के नीचे जन्नत है।" ऐसा भी लिखा हैं कहीं ।  जब एक बेटा या बेटी का जन्म होता है तो केवल एक बेटा या बेटी का ही जन्म नहीं होता है बल्कि उसके साथ-साथ एक माँ भी जन्म लेती है। दुनिया भर के दुःख दर्द को झेल कर, तकलीफों को उम्मीद के दामन से कई बार झटकती है तब कहीं जाकर एक बेटा या बेटी जन्म लेती है, तब वो नन्ही कली/वो घर का दीपक इस विचित्र दुनिया का नज़ारा कर पाता/पाती है। बचपन में मैंने एक कहानी पढ़ा था, कहानी क्या वो इतिहास की घटना थी जिसमें एक शिकारी शिकार के लिए जंगल जाता है बहुत तलाश के बाद उसे एक हिरणी और उसका बच्चा दिखाई देता है शिकारी अपने घोड़े को दौड़ता है हिरणी तो उस शिकारी के गिरफ्त से खुद को बचा लेती है लेकिन उसका बच्चा शिकारी के पकड़ में आ जाता हैं जब शिकारी उस बच्चे को लेकर शहर की तरफ चलता है, तो हिरणी बच्चे की मोहब्बत में खुद-ब-खुद उस शिकारी के पीछे-पीछे चली आती है। उस हिरणी की ममता...