प्लास्टिक मुक्त भारत हो पाएगा ?

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर की गई एक अनोखी पहल ने दुनिया का ध्यान खींचा है एक देश ऐसा है जहां प्लास्टिक जमा करने पर मुफ्त में यात्रा कर सकते हैं उस शहर में हर बस स्टॉप पर एक मशीन लगाए जा रहे हैं जिसमें खाली बोतले जमा करने पर अंक दिए जाएंगे इसका इस्तेमाल करके बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं देखा गया कि लोग यात्रा के दौरान पानी की बोतले खरीदते हैं और पीने के बाद फेंक देते हैं उसे फेंकने के बजाय थोड़ी समझदारी दिखाएं अपनी यात्रा व्यय में लगाए 
UAE के इस पहल से कई फायदे होंगे 
प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण तथा स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को देखते हुए पूरी दुनिया प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की नियमित संजीदा होते दिख सकती है

 भारत सरकार आगामी एक जुलाई से एकल उपयोग प्लास्टिक (Single Use Plastic) के उत्पादन , भंडारण, विक्रय और इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने जा रही है दुनिया भर में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार 1950 में वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण का आकार 20 लाख टन था जो 2017 में बढ़कर 35 करोड़ टन हो गया ।

जबकि अगले दो दशक में इसकी क्षमता बढ़कर दोगुनी होने का अनुमान जताया गया है आश्चर्य की बात है कि जिस प्लास्टिक का आविष्कार मानव जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था वही प्लास्टिक आज पृथ्वी के लिए आपदा तथा मनुष्य और वन्य एवं जलीय जीवो पक्षी और वनस्पतियों के लिए काल बनता जा रहा है प्लास्टिक एक ऐसा प्रदूषक है जो भूमि वायु और जल तीनों तरह के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होता है.
प्लास्टिक कचरे के रूप में पर्वत और पहाड़ से लेकर महासागर की गहराइयों तक अपने जाल बना चुका है 
लगभग हर शहर में प्लास्टिक कचरे का पहाड़ दिखना भी आम बात है क्योंकि प्लास्टिक कभी नष्ट नहीं होता है इसलिए उत्पादित हो जाने के बाद वह धरती पर किसी न किसी रूप में मौजूद ही रहता है प्लास्टिक नदियों मिट्टी और महासागरों में प्रवेश कर हमारी खाद्य श्रृंखला और हमारे शरीर में प्लास्टिक छोटे-छोटे कर धीमी गति से पहुंच रहे हैं और मार रहे हैं जिस प्लास्टिक को हम अपने आसपास फेंक देते हैं वह प्लास्टिक मृदा की उर्वरता और जल धारण क्षमता को कम करता है पेड़-पौधों व जीवों का विकास बाधित होता है
प्लास्टिक हजारों साल तक नष्ट नहीं होता है

प्लास्टिक जब नदी या समुद्र में प्रवेश करता है तो जल की गुणवत्ता को प्रभावित कर जलीय परितंत्र के लिए भी खतरा उत्पन्न करते हैं एक सर्वे के अनुसार प्लास्टिक प्रदूषण से 800 से भी ज्यादा समुद्र व तटीय क्षेत्र में रहने वाली प्रजातियां प्रभावित होती है लोग प्राय प्लास्टिक समुद्र में फेंक देते हैं 
दुनिया भर में हर साल लगभग एक करोड़ दस लाख टन प्लास्टिक कूड़ा कचरा समुद्र में बहा दिया जाता है अगर इसे रोका नहीं गया तो 2040 तक इसके 3 गुने होने के अनुमान जताया गया है 
एक रिपोर्ट की मानें तो समुद्र तल से प्रत्येक एक वर्ग किलोमीटर में अब औसतन 70 किलोमीटर प्लास्टिक Microplastic 
(5 मिलीमीटर से छोटे अंश) के रूप  में स्वसन तंत्र तक पहुंच जाते हैं

जिससे पृथ्वी का ताप और बढ़ रहा है ग्लोबल वार्मिंग पर रोक लगाने में कामयाबी नहीं मिल रही एक प्लास्टिक प्रदूषण एक ऐसी गंभीर पर्यावरण संकट है जिससे केवल जागरूकता से ही खत्म किया जा सकता है प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि आज अगर हम यह कदम नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों को के लिए जीवन अत्यंत कष्ट कर हो जाएगा हमें दृढ़ संकल्प के साथ अपनी आदतों में बदलाव करना होगा ।

__ धन्यवाद 

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