मजदूर दिवस / श्रमिक दिवस 👷

यह दिन श्रमिकों और श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। भारत के साथ-साथ बहुत से देश हैं जो इस दिन श्रमिक दिवस के रूप में मनाते हैं। इसे मनाने का उद्देश्य श्रमिक वर्ग के प्रति अपना आभार व्यक्त करना है। भारत में पहली बार श्रमिक दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया था, जो कि भारतीय श्रमिक किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मद्रास में आयोजित किया गया। भारत में यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या कामगार दिन के रूप में जाना जाता है 

इसे मनाने के पीछे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि श्रमिकों के ऊपर होने वाले अन्याय पूर्ण व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन करना । ताकि लोगों को यह आभास हो कि श्रमिक वर्ग एकजुट है और वह अपने विरुद्ध किसी भी प्रकार के अन्याय व व्यवहारगत को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

पुराने समय से ही श्रमिकों के साथ बहुत ही असमानता का व्यवहार हुआ है और एक लंबे संघर्ष के बाद उन्हें यह अधिकार प्राप्त हुए हैं। श्रमिक दिवस के दिन नेताओं और लीडरों के द्वारा भाषण दिए जाते हैं। उन्हें सम्मानित किया जाता है। अलग-अलग संगठनों द्वारा उन्हें अलग अलग तरीके से सम्मानित किया जाता है। श्रमिक दिवस उद्योगपतियों द्वारा किए गए अन्याय पूर्ण व्यवहार के खिलाफ एकजुट श्रमिक संघ और उनके प्रयासों से सरकार द्वारा दिए गए अधिकार का उदाहरण हैं 

मजदूरों द्वारा  कड़ी मेहनत का सम्मान करने के साथ-साथ श्रमिको के अधिकारों के लिए लड़ने वालों को सम्मान देने के लिये श्रम दिवस मनाया जाता है  संघर्ष करने के बाद मजदूरों को उनका अधिकार मिलता है। मजदूर दिवस को इंटरनेशनल लेबर डे और श्रमिक दिवस भी कहां जाता है। मजदूर का हमारे समाज में बहुत महत्त्व है।हमारे समाज की आर्थिक उन्नति  मजदूर पर निर्भर है। आज के समय में हर काम के लिये मशीन है। लेकिन मशीन चलाने के लिये मजदूरो की जरूरत पडती है। आज समय में मजदूरों का महत्व कम नहीं हुआ, उनकी जरूत उतनी ही है, जितनी मशीन की जरूरत हैं 

पहले की समय में मजदूर की हालत बहुत खराब थी। मजदूर लोग बहुत कड़ी मेहनत करते थे और दिन मे 15 घंटे तक काम करते थे और उनके हाथ, पैर में इतनी चोट लगती थी और आर्थिक संकटो का सामना करके काम करते थे,तब उनके काम पैसे दिए जाते थे। लंबे समय तक घंटो भर काम करते थे। स्वास्थ्य की समस्याओं की बढ़ती हुई संख्या ने इस समस्या को ठीक करने के लिए मजदूरों ने श्रमिक संघ ने इस प्रणाली के खिलाफ आवाज  उठाए

मजदूर वर्ग के लोगों द्वारा श्रमिक आंदोलन चलाया गया। श्रमिक आंदोलन 8 घंटे के रूप में जाना जाता है। इस आंदोलन के पश्चात मजदूर वर्ग के लोगों को 8 घंटे प्रतिदिन कार्य के लिए फिक्स किए गए। सन् 1947 से 1953 के बीच युद्ध के दौरान श्रमिक दिवस पर कई प्रकार की घटनाएं भी हुई 

 मनाने का मुख्य कारण यह है कि 4 मई 1886 को एक बम विस्फोट के 7 पुलिस अधिकारी और 4 शिक्षकों के नागरिक मारे गए थे। उस विस्फोट से एक दिन पहले मजदूरों द्वारा उद्योगपतियों के खिलाफ आंदोलन किया गया था और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को इस रिपोर्ट के जरिए मारा गया। बम विस्फोट के बाद आठ आतंकवादियों की शाजिश का पता लगा और उन सभी दोषियों को आतंकवादी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई। 3 साल बाद समाजवादी पार्टी ने श्रमिक आंदोलन सम्मान देते हुए 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस रूप में संकल्प किया गया

श्रम दिवस या मजदूर दिवस हमें यह सीखता है कि जैसे हम एक साथ जुटकर मजदूर दिवस के खिलाफ रैली, जुलुस निकाल करके मजदूरों को उनका अधिकार दिलवाते है, ठीक इसी प्रकार हमें एक साथ रहकर किसी भी संकट का सामना करना होगा। उद्योगपतियों के द्वारा श्रम वर्ग पर किया गया अन्याय पूर्वक व्यवहार के खिलाफ क़ानून बनाने में सरकार को लम्बा समय लगा। 


    जो भी किसी प्रकार का वेतनभोगी हैं वह एक मजदूर है 


धन्यवाद 🙏

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